Saturday, September 11, 2010

एक ख्वाब चले

चल सके तो एक ख्वाब चले
खुदा करे आसपास शबाब चले

तेरी आँखों का तिलिस्म ठहरे,
फिर कहाँ कोई रुआब चले

तुम कभी सीधा सवाल पूछो,
तब तो कोई जवाब चले

मैखाने की फितरत भी अजब,
शराबी गिरे पर शराब चले

जहाँ भी हो अब चले आओ कि,
थमी धडकनों का हिसाब चले

बेशक निगाह दरिया ना हो,
दर्द उठे तो सैलाब चले

सच से पर्दा क्या उठा 'रोबिन',
महफ़िल से खुसूसी जनाब चले

4 comments:

  1. अच्छी पंक्तिया है .....

    गणेशचतुर्थी और ईद की शुभकामनाये
    इस पर अपनी राय दे :-
    (जानिए पांडव के नाम पंजाबी में ...)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_11.html

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  2. मैखाने की फितरत भी अजब,
    शराबी गिरे पर शराब चले।
    शेर अच्छा लगा बहुत बहुत बधाई

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  3. बेशक निगाह दरिया ना हो,
    दर्द उठे तो सैलाब चले।

    सच से पर्दा क्या उठा 'रोबिन',
    महफ़िल से खुसूसी जनाब चले।

    Robin Sahab aapke blog par aane sukad raha. Sunder gazl jo mili padhne ko.

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